अज़ीम रिश्ते चन्द बातों पे बिखर आये हैं ।
दरारें भला कब उभरने से पहले नजर आये हैं ।
निकले तो हम सबके साथ थे जिंदगी मे ,
मगर लौट के क्यूँ तन्हा से घर आये हैं ।
दरारें भला कब उभरने से पहले नजर आये हैं ।
निकले तो हम सबके साथ थे जिंदगी मे ,
मगर लौट के क्यूँ तन्हा से घर आये हैं ।
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