जाने दे जो चला गया अँधेरा है ।
मत ढूंढ उसमे अब क्या तेरा है ।
ठहरा क्यूँ है साँझ के डर से ,
कदम बढ़ा उस पार सवेरा है ।
क्या है गम जो न पा सका उसे ,
है और इक जहान जहाँ वो तेरा है ।
तू अकेला परेशान नही दुनिया मैं,
हैं सभी जिन्हें आफत ने घेरा है ।
समेत के गम कल का इस्तक़बाल कर ,
जो आग़े है सब कुछ सुनेहरा है ।
मत ढूंढ उसमे अब क्या तेरा है ।
ठहरा क्यूँ है साँझ के डर से ,
कदम बढ़ा उस पार सवेरा है ।
क्या है गम जो न पा सका उसे ,
है और इक जहान जहाँ वो तेरा है ।
तू अकेला परेशान नही दुनिया मैं,
हैं सभी जिन्हें आफत ने घेरा है ।
समेत के गम कल का इस्तक़बाल कर ,
जो आग़े है सब कुछ सुनेहरा है ।
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