गुरुवार, 25 जुलाई 2013

हो मौत का आना तो थोड़ा वो ग़मगीन मिले, 
कुछ यूँ करे खुदा के मुझे तसकीन मिले।

चाहत असमान की कहाँ रखता है परवाज'
बस करे जो वो पर्दा तो दो गज जमीन मिले।

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

सारे वादे......

सारे कसमें वादे रह गए ,
रूठों को मनाते रह गए ।

चेहरे के किनारों से कहीं  ,
ख़ाक हम मिटाते रह गए ।

तेरा वादा था फिर आने का ,
सारा घर सजाते रह गए ।

तुझसे आज कुछ न कह सके ,
दुनिया को सुनाते रह गए ।