देखो किस कदर इंसान बेचारा है ,
हाय ये कमबख्त हालात का मारा है ।
जिंदगी इक नदी बहती ही जाती है ,
कौन जनता है किस तरफ़ किनारा है ।
जी रहे सब जब तलक साँस है बाँकी ,
परवाज तुम कहो अब कौन सहारा है ?
हाय ये कमबख्त हालात का मारा है ।
जिंदगी इक नदी बहती ही जाती है ,
कौन जनता है किस तरफ़ किनारा है ।
जी रहे सब जब तलक साँस है बाँकी ,
परवाज तुम कहो अब कौन सहारा है ?