रविवार, 15 सितंबर 2013

खयालों मे मेरे तुम दबे पाँव आते ,
होंटो से अपने हाल-ए-दिल बताते ।

कैसे बिताई घड़ियाँ काटी हैं कैसे सदियाँ ,
मेरी कहानी सुनते अपनी दास्ताँ सुनाते । 

रविवार, 4 अगस्त 2013

एक कविता सी है

जिन्दगी में कारवाँ आगे भी आएँगे,
जब पुराने साथी पीछे छूट जाएँगे ।

कभी फुरसत मिले तो याद करना,
दूर नहीं हम साथ नजर आएँगे ।

एक कविता सी है दोस्ती अपनी
ता उम्र इसे शिद्दत से निभाएँगे ।

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

हो मौत का आना तो थोड़ा वो ग़मगीन मिले, 
कुछ यूँ करे खुदा के मुझे तसकीन मिले।

चाहत असमान की कहाँ रखता है परवाज'
बस करे जो वो पर्दा तो दो गज जमीन मिले।

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

सारे वादे......

सारे कसमें वादे रह गए ,
रूठों को मनाते रह गए ।

चेहरे के किनारों से कहीं  ,
ख़ाक हम मिटाते रह गए ।

तेरा वादा था फिर आने का ,
सारा घर सजाते रह गए ।

तुझसे आज कुछ न कह सके ,
दुनिया को सुनाते रह गए ।

रविवार, 23 जून 2013

परवाज तुम कहो ....

देखो किस कदर इंसान बेचारा है  ,
हाय ये कमबख्त हालात का मारा है ।

जिंदगी इक नदी बहती ही जाती है ,
कौन जनता है किस तरफ़ किनारा है ।

जी रहे सब जब तलक साँस है बाँकी ,
परवाज तुम कहो अब कौन सहारा है ?

शनिवार, 22 जून 2013

मिलते नहीं

मिलते नहीं ख्वाबों के निशाँ देखो ,
बिछड़ जाते हैं जमीन-ओ-असमाँ  देखो ।

न जाने संग तेरे कब तलक है बसर ,
जिंदगी ले जाती है हमें कहाँ देखो । 
मैं खामोश हो जाऊ अब ,
यही बेहतर है हमारे लिए ।
अपने रिश्ते की टूटती दीवार ,
शायद रुक जाये ऐसे ही ।
वरना सारा प्यार तो रिस ही रहा है ,
लम्हा-लम्हा आवाज की दरारों से ।

मुश्किलें जिंदगी में मेरी

मुश्किलें जिंदगी में मेरी कम नही लेकिन ,
जब तक साथ में है तू मुझको डर नही लगता  । 

कब से जी रहा  हूँ मैं तन्हा मकान में ,
सच कहूँ तेरे बिन वो घर, घर नही लगता । 

गौरव उप्रेती ।।